"अँधेरा आने के लिए खिड़की दरवाजे की जरुरत नहीं होती .
नहीं तो रात में आते हुए अँधेरे को खिड़की-दरवाजे बंद कर रोक देते,
कमरे में इकट्ठे हो गए अँधेरे को बुहार देते."
साभार - खिलेगा तो देखेंगे -
* विवेक कुमार शुक्ल
चेरी ब्लाॅसम के फ़ूलों सा तुम्हारा प्यार प्रिये रखा है मैंने आज भी संजोकर! ये मत पूछो... कहाँ? ये पूछो- कहाँ-कहाँ... जेहन में, दिल की अतल ग...
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