Monday, 30 July 2018

My Cherry Blossom

चेरी ब्लाॅसम के फ़ूलों सा तुम्हारा प्यार प्रिये
रखा है मैंने आज भी संजोकर!
ये मत पूछो... कहाँ?
ये पूछो- कहाँ-कहाँ...
जेहन में, दिल की अतल गहराईयों में, 
पलकों पर, कपोल पर, होंठों के कोनों पर
कलाई पर, हथेलियों पर
सब गुलाबी है चेरी ब्लाॅसम के फूलों सा...
जैसे ही समय मिलता है
या जैसे ही मैं
थोड़ा... सा समय चुरा लेती हूँ
फिर बस, तुम होते हो चेरी ब्लाॅसम के फूलों से;
चारों ओर खिले गमकते हुए और ...
और होती हैं तुमसे ढेरों बातें
रूठना-मनाना सब मेरे हिस्से
और तुम्हारे हिस्से
बस खिलना-खिलखिलाना प्रिये!

अनीता मैठाणी
#ये सब आसमानी क्यूं...
पलकों में समाया
हर ख़्वाब आसमानी क्यूं,
सूरज-चांद-सितारों भरा ये 
आसमां आसमानी क्यूं,
शिशु की आँखों का
रंग आसमानी क्यूं।
नदी, झील, सागर,
झरने का पानी आसमानी क्यूं,
पसंदीदा फूल और इनकी
खुशबू आसमानी क्यूं,
रंगीली दुनिया के कई रंग फिर
सच का रंग आसमानी क्यूं।
खिलते लबों पे ये
हंसी आसमानी क्यूं,
तुमसे मिलने पर हो जाता
ये सब्ज़ बाग आसमानी क्यूं,
हर रोज तुम्हें लिखती
मेरी स्याही आसमानी क्यूं।
ये नशा, ये ख़ुमारी, ये डायरी में रखे
सूखे फूल आसमानी क्यूं
ये इंतज़ार के बाद मिलन फिर मिलकर
बिछुड़ना आसमानी क्यूं,
दर्द - हंसी
कलम का हर हर्फ़ आसमानी क्यूं ...
अनीता मैठाणी

मंत्रमुग्ध सी मैं और गुह्य मंत्र से तुम ...



मंत्रमुग्ध सी मैं और गुह्य मंत्र से तुम ...

मंत्र! 
हाँ मंत्र ही तो हो तुम 
और मंत्रमुग्ध सी मैं।
दिन-रात दोहराती हूँ तुम्हें
दोहराना भी कहाँ निरंतर हो पाता है
बीच में रात जो आ जाती है 
नींद लेकर, 
और नींद आती है सपने लेकर, 
नींद में भी तुम्हें ही दोहराती हूँ
और सपने; 
वो तो तुम्हें जपते हुए ही आते हैं।
जब जपते-जपते तालु से 
जिह्वा चिपक जाती है।
तब बंद आँखों में उठकर 
टटोलते हुए गटक जाती हूँ 
पूरी बोतल पानी के साथ
पुनः तुम्हें जपने के लिए।
तभी सुबह नहीं खुल पाती
मंत्र जाप से थकी आँखें...
तथापि उठती हूँ
जपने को मंत्र।
हाँ मंत्र ही हो तुम मेरे लिए...
गुह्य मंत्र-
जिसे जपते रहने के बाद भी मैं 
अनभिज्ञ रही आशयों से ...
मंत्र का जाप- 
मन के भीतर के आंदोलनों को 
शांत कर देता है,
परंतु ये मंत्र हर जाप के साथ 
गुह्य होता जाता है...
मंत्रमुग्ध सी मैं और गुह्य मंत्र से तुम ...

अनीता मैठाणी

My Cherry Blossom

चेरी ब्लाॅसम के फ़ूलों सा तुम्हारा प्यार प्रिये रखा है मैंने आज भी संजोकर! ये मत पूछो... कहाँ? ये पूछो- कहाँ-कहाँ... जेहन में, दिल की अतल ग...