Monday, 30 July 2018

#ये सब आसमानी क्यूं...
पलकों में समाया
हर ख़्वाब आसमानी क्यूं,
सूरज-चांद-सितारों भरा ये 
आसमां आसमानी क्यूं,
शिशु की आँखों का
रंग आसमानी क्यूं।
नदी, झील, सागर,
झरने का पानी आसमानी क्यूं,
पसंदीदा फूल और इनकी
खुशबू आसमानी क्यूं,
रंगीली दुनिया के कई रंग फिर
सच का रंग आसमानी क्यूं।
खिलते लबों पे ये
हंसी आसमानी क्यूं,
तुमसे मिलने पर हो जाता
ये सब्ज़ बाग आसमानी क्यूं,
हर रोज तुम्हें लिखती
मेरी स्याही आसमानी क्यूं।
ये नशा, ये ख़ुमारी, ये डायरी में रखे
सूखे फूल आसमानी क्यूं
ये इंतज़ार के बाद मिलन फिर मिलकर
बिछुड़ना आसमानी क्यूं,
दर्द - हंसी
कलम का हर हर्फ़ आसमानी क्यूं ...
अनीता मैठाणी

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