Wednesday, 12 July 2017

नगमा ए उल्फ़त लिखे जाता हूँ
मैं तुझे देख कर गज़ल कहे जाता हूँ खुदगर्ज़ इतना मैं तेरी मोहब्बत में हूँ गज़ल पर अपनी मैं तुझसे ही दाद चाहता हूँ. बेकस रहता था मिलने से पहले बेकल सा हूँ तुझसे मिलने के बाद . नादान हूँ मै तुझसे भी नादानियाँ चाहता हूँ. तुझमें अब बस मैं ही मैं रवां चाहता हूँ.



#अनीता मैठाणी

Tuesday, 11 July 2017

दूर से आती रही आहटें
उड़ता रहा झीना सा पर्दा
टिमटिमाता रहा यादों का
दिया सा... दिया सा
तार बजता रहा रुनझुन सा
दिल का.

समझ पाए जब तलक
दस्तक ये दिल का
तरन्नुम ये दिल का
गुनगुनाने से पहले
शाम होने लगी,
याद धुंधला गई.

भूल जाने से पहले
फिर एक बार  
तेरे आने की आहट तो हो
खनक ऐसी हो
कि;
फिर साज़ ऐसा हो,  
दिल के संगीत का
हर अल्फाज़ ऐसा हो
बजता रहे ताउम्र जो  
जब तलक देह में जान हो.
देह... में प्राण हो.


अनीता मैठाणी

Sunday, 9 July 2017

मेरे बादलों से मिलो...

बहुत हुआ सुनना सुनाना
  आओ कुछ घडी चुप बैठें,
तुम कुछ मुझे समझो
  आओ कुछ मैं तुम्हे जानूँ.
फिर करेंगे चाँद की बातें
  आज तुम मेरे बादलों से मिलो,
कुछ बूंदे इसमें तुम्हारी हैं
  वो तुम रख लो
छोड़ दो कुछ जो मेरी हैं.
  और कुछ जो हमारा है
उसको ऐसा करो
  कुछ दिन उसे तुम रख लो

कुछ दिन उसे मैं रख लूं.

##अनीता मैठाणी 

My Cherry Blossom

चेरी ब्लाॅसम के फ़ूलों सा तुम्हारा प्यार प्रिये रखा है मैंने आज भी संजोकर! ये मत पूछो... कहाँ? ये पूछो- कहाँ-कहाँ... जेहन में, दिल की अतल ग...