Monday, 13 February 2017

लिफाफा


एक लिफाफा-
रोज हमें जोड़ता है,
हर शाम.. हर पल.. तोड़ता है; मौन-
जो पसरा है आसपास-
ये लिफाफा हमारी भावनाओं,
अंदरूनी गिले-शिकवों, नुक्ताचीनी
झुंझलाहट, परेशानियों को समेटता;
है अपने गर्त में- अपने भीतर
लिफाफा समझदार होता है!

मजमून पढ़कर लोग सब जान जाते हैं-
लिफाफा,
बहुत होता है समझदार
गंभीर मजबूत व कभी
कमजोर भी-
खूबियां बचाता है,
कमजोरी भी उजागर करता है।
भावनाओं का पुल तेज धार
को समेटने वाला विश्वासपात्र
तट;
स्वर्णिम रश्मियों का उजास समेटता
खुशियां बांटता है लिफाफा
खुशियां बांटता है लिफाफा
दिलों को जोड़ता, तोड़ता है लिफाफा!

मनो मस्तिष्क में, रक्त कणिकाओं
में अपनापन भरा चिन्तन मनन,
विश्वास जोड़ता है लिफाफा,
प्यार को स्नेहिल मुहर के साथ,
बहुत तेज दौड़ता है
लिफाफा
अन्त से अनन्त तक!!


अनीता

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