Wednesday, 1 February 2017

तुम ....................


तुम भावनाओं का अतिरेक हो 
तुम आशाओं का अभिप्राय हो;
तुम सफलताओं का प्रतीक हो
तुम यश का सम्बल हो।

दोस्त, मित्र, साथी के साथ 
तुम जीवन का यथार्थ हो, सच हो
सपनों के संसार का दर्पण रूपी 
दर्शन हो।

तुम मेरे लिए सच में 
बहुत प्रेरणाओं से ओत प्रोत हो
स्नेह का बंधन हो 
मित्र;
तुम वर्तमान का झूठ और 
भविष्य का सच हो।

अनीता

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