Friday, 22 September 2017

नौ मीटर लम्बा फॉयल

सुबह का समय
बच्चों वाले घरों में
एक सा ही नजारा होता है
घड़ी की टिक टिक के साथ
रसोई में दो-दो हाथ करती मांए।
सुविधा के नाम पर;
गैस चूल्हा कम्पनी ने
मुसीबत में डाल दिया
ज्यादती ही कर डाली,
माँओं के साथ।
एक से दो, दो से तीन और
अब तीन से चार चूल्हे।
चूल्हा खाली नहीं है वाला जुमला बेअसर,
भले ही, हाथ अभी भी दो ही है।
रसोई से बैडरूम तक
फिरकी की तरह घूमती मांए
कभी यूनिफाॅर्म, मौजें पकड़ाती
और कभी
बच्चों की पसंद का रखकर ध्यान
रोज कुछ नया परोस देती,
जिससे बच्चा ब्रेक टाईम में
सुपर माॅम के प्यार (टिफिन) को
दोस्तों के साथ शेयर कर सकें।
हर सुबह की तरह ही थी
आज की सुबह
पर चिकने हाथों में लिया
एल्युमिनियम फाॅइल का रोल
फिसलकर खुला और
खुलता चला गया,
जब तक संभाल पाती
पूरे किचन में बिखर गया।
पीछे से आती पति और बच्चों की आवाजें
टिफिन में कितनी देर है के बीच।
बस पांच मिनट कहते हुए
बचा हुआ रोल हाथ में ज्यों ही उठाया
वो खनकने लगा;
सुर और ताल में
एल्युमिनियम फाॅइल गा रहा था
बेहद सुरीला...
कोई जल्दी नहीं थी उसे।
दो-चार बार ढील देकर हिलाया उसे
वो खनकने लगा
नवजात शिशु की हंसी सा
किशोरी के पांवों में पड़ी पायल सा
दुल्हन की खनकती चूड़ियों सा
अल्हड़ नदी सा
पहाड़ों से गिरते पतले झरने सा।
मैं भी सबसे बेखबर
थिरकने लगी...
समेटते हुए चांदी सा;
नौ मीटर लम्बा फाॅइल,
उसकी पैकिंग पर यही लिखा था...
अनीता मैठाणी

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