Tuesday, 21 March 2017

तेरी बेबाकी......

तेरी बेबाकी से ...
बेबाक होना आया,
जिंदादिली किस चिड़िया का नाम है-
 अब ये समझ आया,
बेबाकी को मान बैठे थे गुनाह।
वो गुनाह करके;
 जीने का क्या है मजा
अब वो मज़ा समझ आया।

तेरी हंसी से हंस पड़े हम भी
क्या है हंस कर जीना ये भी
अब समझ आया।
तूने अपना बनाया,
तो सबको अपना बनाने में क्या है मजा,
अब वो मजा समझ आया।
दामन में भर कर ग़म ज़माने के
अपने हिस्से की खुशियां लुटाकर जीना
अब समझ आया।

चारदीवारी में तो सब मिलकर रहते हैं,
चारदीवारी के बाहर
सरहद के पार तक,
क्या है मिलकर रहना अब समझ आया।
क्या है ऐसे जीने में मजा
अब वो मजा समझ आया।
तुझको देखा तो ज़िन्दगी का हर मजा
समझ आया।

अनीता मैठाणी

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