Friday, 3 March 2017

स्पर्श ...

एक रोज की बात] जब;
दायीं हथेली पर तुम्हारे
बांयी हथेली की तीन उंगलियों का स्पर्श
महसूसा था मैंने।
सिर्फ हथेलियां महसूसतीं
तब तलक ठीक था]
पर रूह तक भीग गयी उसमें
महसूस कर लिया उसने भी उसे;
जिसे स्पर्श कहते हैं।

बस गया है वो अब]
निष्प्राण होने तक
भुलाया नहीं जा सकेगा।
नर्म-गर्म कुछ गीला सा- गुदगुदाता हुआ
अहसास बन गया है वो स्पर्श!
जिसने छुआ तो हथेली को था
पर अहसास की तरह भिगो गया
मेरा पूरा वजू़द।

जो दे जाता है कभी
तुम्हारी यादों की दस्तक
दिल में मीठी चुभन की तरह]
वो अतिरेक था प्यार का
जो क्षणिक होकर भी ठहर गया(
और सदा रहेगा मेरे साथ
वो स्पर्श!!

अनीता


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