Sunday, 9 July 2017

मेरे बादलों से मिलो...

बहुत हुआ सुनना सुनाना
  आओ कुछ घडी चुप बैठें,
तुम कुछ मुझे समझो
  आओ कुछ मैं तुम्हे जानूँ.
फिर करेंगे चाँद की बातें
  आज तुम मेरे बादलों से मिलो,
कुछ बूंदे इसमें तुम्हारी हैं
  वो तुम रख लो
छोड़ दो कुछ जो मेरी हैं.
  और कुछ जो हमारा है
उसको ऐसा करो
  कुछ दिन उसे तुम रख लो

कुछ दिन उसे मैं रख लूं.

##अनीता मैठाणी 

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