Monday, 12 June 2017

##टफ्फन्ड् ग्लास## 

अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था दीप्ति और आलोक ने। दीप्ति के घर वालों को मनाने में आलोक और दीप्ति कामयाब हुए थे। परंतु आलोक के घर वाले आलोक के बहुत मनाने पर भी राजी नहीं हुए इस रिश्ते के लिए। आलोक कुछ साल इंतज़ार करता रहा। अंततः आलोक ने उनकी मर्जी के बिना शादी करने का फैसला किया था। दीप्ति के घरवालों के मन में इस बात को लेकर कुछ समय अपराधबोध और खटका बना रहा।
दोनों शादी के बाद एक किराये के मकान में रहने आये, शादी में उन्हें घर से और कुछ मित्रों से घर का जरूरी सामान मिला था। दीप्ति और आलोक ने विवाह में मिले तोहफों और अपने प्रेम से दो ही दिनों में मकान को घर बना लिया। कुछ दिन बाद वे एक फर्नीचर के शोरूम पर गये और कुछ चेयर-टेबल देखने लगे। दोनों को राॅट आयरन का ग्लास टाॅप वाला सेंटर टेबल पसंद आ रहा था। पर उसकी मजबूती को लेकर दोनों सशंकित थे, इस पर शो रूम मालिक ने कहा, आप इसकी मजबूती के बारे में बिल्कुल चिंता ना करें। यह टफन्ड् ग्लास है; बहुत मजबूत है। आप इस पर चढ़ कर देख सकते हो। यह सुनते ही आलोक उस पर चढ़ गया और हल्के-हल्के टैप करने लगा। शोरूम मालिक बोला- वाह बेटा! बहुत हिम्मत वाले हो। दिन भर में मैं कई लोगों को कहता हूँ ये टेबल मजबूत है चाहो तो चढ़ कर देख सकते हो, पर आज तक कोई नहीं चढ़ा। तुम पहले इन्सान हो जो चढ़ गये। यह सुनकर दीप्ति मन ही मन मुस्कराने लगी और बड़े प्यार से आलोक को देखने लगी। सोचने लगी- हिम्मत! टेबल पर चढ़ना आलोक के लिए कोई हिम्मत का काम नहीं था, हिम्मत का काम तो उसने तब किया था जब उसने अपने घरवालों की मर्जी के बगै़र उससे शादी का फैसला किया था। आलोक की उस हिम्मत की वजह से ही आज दोनों साथ थे। आलोक ने दीप्ति को मुस्कराते हुए देखा तो वो भी मुस्करा दिया।
टेबल-चेयर फाइनल कर आलोक ने पेमेन्ट किया और रिक्शेवाले को घर का पता समझाया और दोनों बाहर निकल आये। बाइक को किक मारते हुए आलोक ने दीप्ति से पूछा, तुम मुस्करा क्यूं रही थी, इरादा क्या है मैडम! दीप्ति ने बाइक पर बैठते हुए आलोक को कस कर पकड़ लिया और बोली- मैं तो अंकल की बात पर मुस्करा रही थी, उन्हें क्या पता कि तुम कितने हिम्मत वाले हो, तुम्हारे हिम्मत से लिए गये शादी के निर्णय की वजह से ही आज हम साथ हैं। आलोक के मुंह से ह्म्म निकला, दीप्ति ने हौले से आलोक के कंधे पर अपना सिर रख दिया और दोनों बाइक की रफ़्तार के विपरीत उस पल में ठहर कर जीने लगे।

#अनीता मैठाणी#

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